अयोध्या राम जन्मभूमिक संक्षिप्त इतिहास

त्रेतायुग में भगवान् राम सरयूक तट पर अवस्थित अयोध्या नगरी मे विष्णुक अवतारक रूपमे जन्म लेलनि।

विक्रमादित्य परम्पराक आधार मान्यता-प्राप्त ओहि जन्मस्थान पर विशाल मन्दिर बनाओलनि। ई कथा फ्रांसिस बुकानन अपन गोरखपुर रिपोर्टमे 1810 ई.मे लिखैत छथि।

विक्रमादित्यक बनाओल मन्दिर जखनि कालक्रमसँ ध्वस्त भए गेल तखनि 12म शतीमे गहड़वालक राजा गोविन्दचन्द्रक सामन्त अनयचन्द्र जन्मस्थान पर विशाल मन्दिर बनओलनि जेकर शिलालेख विवादित ढाँचा खसएबाक क्रम मे 6 दिसम्बर, 1992 कें भेटल छल।

15-16 शतीमे मिथिलाक एकटा राजा एतए तीर्थयात्राक क्रममे गेलाह। ओतए रामजन्मभूमि पर अवस्थित मन्दिरमे भगवानक मूर्तिक दर्शन केलनि. ओतए भगवान् श्रीराम माता कौशल्याक कोरामे स्थापित रहथि। राजा सोनाक छोट घंटी चढओलनि। ओतए परम्परानुसार सोनाक घंटी चढाओल जाइत छल। ओतए दीप जराए मन्दिर प्रांगणमे एक चबूतरा पर पितरक श्राद्ध केलनि।– ई कथा रुद्रयामलक सारोद्धारक तीर्थविधान नामक अंशमे उपलब्ध अछि, जकर पाण्डुलिपि हमर संग्रहमे सुरक्षित अछि आ एकर आधार पर आलेखक प्रकाशन सेहो भेल अछि। एहि अंशक रचनाकाल आन्तरिक आ बाह्य स्रोतक आधार पर 51-16 शती सिद्ध होइत अछि।

 अयोध्यायां   सरित्तीरे    स्वर्गद्वारे    नराधिपः।।45।।
विप्रेभ्यो   दक्षिणां   दत्वा   गत्वा रामालयं प्रति।
निलीनं    जननीक्रोडे      नीलाम्बुजसमप्रभम्।।46।।
प्रणम्य    राघवन्तत्र    जन्मभूमौ     विधानतः।
कृत्वा   प्रदक्षिणं  सम्यक्  स्थापयामास  मन्दिरे।।47।।
किङ्किणीं  हाटकमयीं  शिंजितां  चपलां शुभाम्।
यदि  रामालये  कश्चिद् दद्यात्  स्वर्णघण्टिकाम्।।48।।
न तत्कुलविनाशः  स्यात्  सर्वे  स्युः  पुत्रपौत्रिणः।
न   काचिद्विधवा  नारी  तस्य  वंशे  भविष्यति।।49।।
स्वाङ्के   निधाय  तनयं   कौशल्येव     राघवम्।
मोदते     तद्गृहे     नारी    सर्वाभरणभूषिता।।50।।
घृतदीपं   प्रतिष्ठाप्य   राजा  तत्र   प्रणम्य  च।
चत्वरे  श्राद्धमकरोत्   पूर्वजानां    कृते   ततः।।51।।
कृतकर्मा    नृपस्तत्र     नत्वा   विष्णुहरिं पुनः।
लोकनाथं   शिवं   नत्वा  पर्व्वते  विजने   वने।।52।।
सरयूतीरमाश्रित्य   गोप्रतारं      गतः     पुनः।
गाः  पस्पर्श  बहुशो घ(टोध्न्यो हे)  म भूषिताः।।53।।
कार्तिकैकादशीं   प्राप्य   शुक्लपक्षे    नराधिपः।
विष्णोर्जागरणं   कृत्वा  स्वदेशं     प्राचलन्मुदा।।54।।

1575 ई.मे गोस्वामी तुलसीदास रामचरित मानसक रचना केलनि तँ ओ लिखैत छथि जे चैत्रशुक्ल नवमीकें हम हरिक पद पर माथ राखि ई रचना आरम्भ करैत छी।

संबत   सोरह  सै  एकतीसा। करउँ  कथा हरि  पद  धरि  सीसा।।2।।

नौमी  भौम  बार   मधुमासा। अवधपुरीं   यह   चरित    प्रकासा।।

जेहि दिन राम जनम श्रुति गावहिं। तीरथ सकल तहाँ  चलि आवहिं।।3।।

असुर नाग खग नर मुनि देवा। आइ    करहिं   रघुनायक    सेवा।।

जन्म  महोत्सव रचहिं सुजाना। करहिं  राम  कल   कीरति  गाना।।4।।

1535 ई.क लगभगमे वृन्दावन दास बंगला भाषामे चैतन्य-भागवतक रचना केलनि तँ ओहिमे ओ उल्लेख करैत छथि जे महाप्रभु चैतन्य अयोध्या गेलाह आ ओतए रामजन्मभूमि देखि भावावेशसँ कनलाह।

               अयोध्या
तवे गेला  नित्यानन्द  अयोध्या  नगर।
राम जन्मभूमि देखि कान्दिला विस्तर।।122।।

एतए स्पष्ट कए दी ओ सभ स्थान पर जाए भावावेशसँ कनैत छथि। हुनक क्रन्दन वर्णन सँ मन्दिरक टूटब नहिं मानल जा सकैत छैक।

1590 ई. मे जखनि अबुल फजल आइन-ए अकबरी लिखलनि तखनि ओ अयोध्यामे रामजन्मभूमिक उल्लेख विस्तारसँ केने छथि जे केना रामनवमीक दिन लाखोंक संख्यामे भक्त एतए अबैत छथि आ भगवान श्रीरामक दर्शन करैत छथि। ओ अयोध्यामे ओहि स्थान पर कोनो मस्जिदक उल्लेख नै करैत छथि। माने 1590 धरि ओतए मस्जिद नै, मन्दिर छल।

1610 ई.मे जखनि विलियम फिंच नामक यात्री अयोध्याक सम्बन्धमे लिखैत छथि तँ ओतए कोनो मस्जिदक चर्चा नै करैत छथि बल्कि रामक रूपमे भगवान् विष्णुक अतवारत उल्लेख करैत छथि।

1631 ई.मे जाॅन्स डे लेट (Joannes De Laet) नामक यात्री De Imperio Magni Mogolis Sive India Vera Commentarius प्रकाशित केलनि तँ ओहो विलियम फिंचक द्वारा कहल गेल सभटा बात लिखलनि।

1934 ई.मे थॉमस हरबर्ट (Thomas Herbert) Some Years Travels Into Divers Parts of Africa and Asia the Great नामक पुस्तक प्रकाशित केलनि तखनि ओ लिखैत छथि जे अयोध्यामे बहुत रास पुरातात्त्विक महत्त्वक स्मारक अछि जाहि मे एकटा ओहो मन्दिर अछि जे कहल जाइत छैक जे हिन्दू गणनाक अनुसार 994500 वर्ष पूर्व रामचन्द्रक द्वारा बनाओल गेल छल। – एतए स्पष्ट अछि जे अनयचन्द्रक द्वारा मन्दिर सेहो पुरान भए गेल रहैक आ जनमानसमे ओकर निर्माणक इतिहास बिसरा गेल छल। तखनि ओकरा रामचन्द्रक द्वारा बनाओल कहल जाए लागल छल।

1660 ई.मे औरंगजेबक आदेशसँ अयोध्याक तीन मन्दिर ध्वस्त कएल गेल- स्वर्गद्वार मन्दिर, त्रेता का ठाकुर मन्दिर आ जन्मभूमि मन्दिर। ओहि कालमे अवधक गवर्नर फिदाइ खान रहए। ओतए मूल मन्दिरक 14 टा स्तम्भ यथावत् रहए देल गेलैक आ बाँकी अंशकें तोडि तीन टा गुंबद बला मस्जिद बना देल गेल।

1950 ई. मे एहि 14 स्तम्भक स्थान निर्धारण शिवशंकर लालक द्वारा कएल अछि तकर चित्र एहि रूपमे अछि।

Map of kasauti pillars at Rama Janma Bhumi
कसौटी पाथरक खम्भाक बीच मूल गर्भगृह जे रामजन्मस्थान छल ओकरे टिफेनथेलर वेदी कहैत छथि।

मन्दिर ध्वस्त भेल, मस्जिद बनियो गेल मुदा ई स्थित बेसी दिन नै चलल। भक्त हिन्दू लोकनि फेर अपन पूजा-पाठ ओही ढाँचामे करए लगलाह। गर्भगृहक स्तम्भ छले। 1675 ई. धरि ई स्थिति आबि गेल।

1675 ई.मे जखनि लालदास अवधविलास नामक महाकाव्य लिखलनि तँ ओ जन्मासनक चर्चा कएलनि जे जँ कोनो बालक एहि जन्मासनक स्पर्श करैत अछि तँ ओकर सभ रोग-व्याधि दूर भए जाइत अछि। लालदास एतय एकटा मान्यताक उल्लेख केने छथि। आइयो पटनामे अगमकुआँक पानिसँ नहेला पर बच्चाक सुखौंती बिमारी दूर हेबाक मान्यता अछि।

नोमी  चैत  मास  उजियारी। व्रत्त  करै  दरसन   नर नारी।।

जो  बालक परसै  जन्मासन। रोग दोष गृह व्याधि बिनासन।।

एकर अर्थ ई भेल जे 1675 ई. धरि ओहि तथाकथित मस्जिदमे पूजा-पाठ आरम्भ भए गेल। मूर्ति नै छल, मुदा जन्मासन छल एकटा बेदीक रूपमे। एकरे जन्मस्थान मानल जाए लागल।

औरंगजेबक समकालीन इतिहासकार सुजान राय भण्डारी जखनि खुलसतु-त तबारीख लिखलनि तँ ओहो अयोध्याकें भगवान रामक जन्मस्थान रहबाक कारणें सभसँ पवित्र नगर मानलनि।

1759-60मे राय चतुरमन जे अयोध्यामे प्रसिद्ध दर्शनीय स्थान सभमे राजा रामचन्द्रक जन्मस्थान अछि।

1767 ई.मे जखनि जोसेफ टिफैनथेलर जिनका भारतमे भूगोलक जनक कहल गेल अछि, अयोध्याक वृत्तान्त लिखलनि तँ ओ रामजन्मस्थानक विस्तारसँ वर्णन कएलनि। ओ अपन पुस्तक Description Historique Et Geographique De L’inde में लिखैत छथि जे औरंगजेब इ मन्दिर ध्वस्त कए मस्जिद बनाओल। केओ केओ कहैत छथि जे ई बाबरक बनाओल थीक।

टिफैनथेलर लिखैत छथि जे कसौटी पाथरक खम्भाक बाद वामाकात एकटा वेदी अछि, जे 15 फीट चौड़ा आ 17 फीट लम्बा आ 5 इंच ऊँच अछि। हिन्दी ओकरा बेदी कहैत छथि आ मानैत छथि जे  एतए रामक जन्म भेल छल। हिन्दू ओकर परिक्रमा करैत छथि आ बेदीक सामने झुकि प्रणाम करैत छथि।

1801 ई.मे C. Mentelleक पुस्तक Cosmography (Cosmology), on Geography, on Chronology and on Ancient and Modern History छपल तँ ओहिमे लिखल गेल जे अयोध्यामे रामक राजमहल छल जतए हुनक अवतार मानल जाइत अछि। एहि स्थानकें आ काशी आ मथुरामे सेहो औरंगजेब मन्दिर सभ ध्वस्त केलक।

1810 ई.मे फ्रांसिस बुकानन अयोध्याक सर्वेक्षण केलनि। एहि मस्जिदसँ एकटा शिलालेख हुनका भेटलनि। जे पढबाक लेल आ अंगरेजी अनुवाद करबाक लेल ओ कोनो स्थानीय मौलबी कें देलनि। ओ मौलबी ओहिमे मारते रास बात सभ जोड़ि, खिस्सा-पिहानी लीख हुनका दए देलनि। ओएह आधार बनल। आ बादमे बाबरक नाम दृठतापूर्वक लेल जे लागल। मुदा बुकानन जखनि अयोध्याक नक्शा प्रस्तुत कएलनि तँ ओहो बाबरी मस्जिद नहिं लीखि ओहि स्थान कें जन्मस्थानक रूपमे चिह्नित केलनि आ हिन्दू मन्दिरक चिह्नक व्यवहार केलनि। हुनके नक्शामे मस्जिदक लेल दोसर चिह्न देल गेल अछि। एकर अर्थ भेल जे 1810 ई. मे ओ स्थान जन्मस्थान कहबैत छल, बाबरी मस्जिद नै।

Janma Sthan in Buchanan's Report
1810 ई.मे बाबरी मस्जिद ने जन्मस्थान कहबैत छल।

1855 सँ 1858 धरिक अनेक गजेटियर आ तीर्थयात्रीक साक्ष्यक अनुसार रामनवमीक दिन लाखों यात्री ओतए अबैत रहलाह।

1858 ई.मे महाराष्ट्रक तीर्थयात्री विष्णुभट्ट गोडसे वसीकर द्वारा प्रस्तुत वृत्तान्त सभसँ विस्तृत अछि।

1858 ई.मे हिन्दू-मुस्लिम विवाद बढल। पंजाबसँ 25 टा सिख आबि जखनि विवादित ढाँचाक गर्भगृह मे पूजा-पाठ-हवन आदि आरम्भ केलनि तँ एकटा खातिब सैय्यद मुहम्मद थाना मे आवेदन देलनि जे बीच मस्जिदमे पुरना जमानामे सैकड़ों वर्षसँ जतय वेदी छल ओहि ठाम एक कातमे ई सिख लोकनि पूजा-पाठ कए रहल छथि। ई मस्जिद थीक, तें हिनका सभकें निकालल जाए। मस्जिद होएबाक पहिल दाबा यैह थीक, जाहिमे ओतए सैकड़ों वर्षसँ वेदी होएबाक बात स्वीकारल गेल अछि।

मुस्लिम दिससँ एकटा एहन कागज देखाओल जा रहल अछि जे 1860 .क थीक जाहिमे कहल गेल अछि जे ई नानकार हुकुम बोर्डक दिससँ जारी कएल गेल अछि, जखनि कि 1858 ई.मे भारतसँ बोर्ड समाप्त भए गेल छल।

एकटा दस्तावेजमे देखाओल गेल अछि बाबरक आदेश पर जे मीर मीर बाकी मस्जिदक निर्माता कहल गेल अछि ओ मीर बाकी 1860क दशक मे जीवित पीठीसँ मात्र पाँच पीढी पूर्व भेल छल। एहिमे एक पीछीक लेल 105 वर्ष होइत अछि जे असम्भव छैक आ तें ई दस्तावेज फर्जी अछि।

एकर विपरीत 1870 ई.मे अवधक सेटलमेंट आफिसर पेट्रिक कार्नेगीक एकटा पुस्तक  “A Historical Sketch of Fyzabad Tehsil, including the former Capitals, Ajudhia and Fyzabad” छपल तँ ओहिमे जे विवादित ढाँचाक फोटो छपल ताहिमे ओकरा बाबरक मस्जिद आ रामक जन्मस्थान दूनू कहल गेल अछि।

Rama Janma Bhumi photograph in 1870
पी. कार्नेगीक पुस्तकमे 1870मे प्रकाशित फोटो

1902 ई.मे तारीख-ए-अयोध्या पुस्तक छपल तँ ओहिमे एहि ढाँचाकें मस्जिद नै, जन्मस्थान मानल गेल। एही फोटोमे देखाओल गेल अछि जे हिन्दूलोकनि पूर्वी द्वारसँ प्रवेश कए रहल छथि।

Rama Janma Bhumi in 1902

1934 ई.मे एकबेर हिन्दूलोकनि एहि ढाँचा पर आक्रमण कए एकरा क्षतिग्रस्त कएलनि तँ सामूहिक अंगरेज सरकार सामूहिक जुर्माना लगाए एकर मरम्मत कराओल।

एहि मस्जिदमे केवल शुक्र दिन नमाज होइत छल आ 1949 ई.मे विधिवत् श्रीरामक मूर्ति राखि पूजा-पाठ आरम्भ भेल।

एहि प्रकारें देखैत छी जे 1855 ई. धरि एहि स्थान पर मुस्लिमक कोनो उपस्थिति नै छल। एकर बादसँ श्रीरामक जन्मस्थान पर मुसलमानलोकनि अपन दावा आरम्भ केलनि, फर्जी दस्तावेज सभ बनबाओल गेल आ संघर्षक युग आरम्भ भेल। एकरा समाप्त करबाक लेल अंगरेज अधिकारी उत्तर दिस द्वार सेहो खोलओलनि, मुदा क्रमशः मुसलमानलोकनि प्रभावी होइत गेलाह आ जन्मस्थान छिनाइत गेल।