आतंकवादीक सरदार रावण

आतंकी साम्राज्यक अंत- राम-रावण युद्ध

बहुतो इतिहासकार अपन कल्पनाक बल पर लिखैत रहलाह अछि जे राम-रावणक युद्ध आर्यलोकनिक साम्राज्य-विस्तारवादी नीतिक परिणाम छल आ एहि कल्पनाक आधार पर राक्षसकें एक वर्ग मानि भारतमे वर्गवादक विष पसारि रहल छथि। दाशराज्ञ आ इन्द्रक युद्धक सम्बन्धमे सेहो एहने बात पसारि भारतीय भावनाकें ठेस पहुँचओने छथि। दाशराज्ञ युद्ध पर फेर सँ लिखबाक प्रयोजन छैक। ता धरि एतए राम-रावण युद्ध पर विचार करी।

राक्षस कोनो समुदाय, वर्ग अथवा जाति नै, एकटा प्रवृत्ति थीक। राक्षसी प्रवृत्ति थीक- अपराध। राक्षस माने अपराधी माने आतंकी। रावण स्वयं कुबेरक भाइ छल, मुदा अनकर वस्तु छिनबाक प्रवृत्तिक कारणें राक्षस कहौलक आ सुदूर दक्षिण जाए अपन आतंकी साम्राज्यक बसौलक जे दण्डकारण्य धरि पसरि गेल रहैक। राम आ लक्ष्मण ओकरे विनाश कएलनि। रावणक परम मित्र बालीकें सेहो मारलनि, मुदा बालिएक भाइ सुग्रीव कें अपनौलनि।

राम दरबार
नमोस्तु रामाय सलक्ष्मणाय देव्यै च तस्यै जनकात्मजायै।

ई तँ हम सभ जनैत छी जे रावण लंकाक राजा छल। ओ महाने शिवभक्त छल, विद्वान् छल आ सभसँ पैघ बात जे ओ ब्राह्मण छल। रावणकें अनेक शास्त्रक प्रणेता मानल जाइत रहल अछि। रावणक नाम पर विमानशास्त्र धरि रचल गेल। ई सभ तँ ठीक अछि, किन्तु भारतक परम्परा रह अछि जे जँ एहनो व्यक्ति शान्तिप्रिय वनवासीक अकारण हत्या, छिन-अछोड आ विध्वंस सँ संलिप्त रहल हो तँ ओकरहु जन-मानस खलनायक मानि लेबामे देरी नै करैत अछि।

अर्थशास्त्रक प्रणेता कौटिल्य सेहो रावणक उल्लेख करैत लिखैत छथि जे अनकर पत्नीक अपहरणक कारणें रावण मारल गेल आ अनकर धनक अपहरण करबाक कारणें दुर्योधन मारल गेल। तें राजाकें चाही जे ओ अनकर धन आ पत्नीक अपहरण नै करथि।

हमसभ मानि लैत छी जे सीताक अपहरण करबाक कारणें रावणक वध भेल। आ तखनि रावण सीताक संग कोनो जबरदस्ती नै केलक ई कहैत रावणकें दोषमुक्त कए ओकरा प्रति कोमल भावना पालि लैत छी। मुदा रावण वधक असली कारण सीताक हरणसँ पूर्वहिँ रचल गेल छल से हमरालोकनि बिसरि रहल छी।

वाल्मीकीय रामायणक आधार पर रावण आ ओकर सरगनाक द्वारा मचाओल गेल आतंक पर विचार करी। राम जखनि विश्वामित्रक आश्रममे यज्ञ-रक्षा करबाक लेल आएल रहथि तखनहिं रावण आ ओकर सरगनाक वधक सूत्रपात भए चुकल छल।

ताडका-वध-

रावण एसकरे नै, ओकर पूरा खानदान आतंकवादी गतिविधि सभमे संलग्न रहए। रावणक एकटा नाना सुंद, सुकेतु यक्षक पुत्री ताडकाक अपहरण कए, ओकरा अपन पत्नी बनाए लेलक आ ओहीसँ मारीच नामक राक्षसक जन्म भेल छल। रावण पहिल अपहर्ता नै, ओकर नाना सुन्द सेहो ओहने रहैक। सुन्दक सम्पर्कमे रहि ताड़का सेहो राक्षसी प्रवृत्ति, माने हत्या, लूट आदिक कार्यमे लागि गेल आ लंकासँ सुदूर उत्तर भारतवर्षक मध्यमे वर्तमान बिहार प्रान्तमे अपन क्षेत्र बनाए लेने रहए। एहि ताडकाक वधक बाद मारीच भागि गेल आ समुद्रक पार रावणक शरण पहुँचल आ रावण आतंकी सरगनाक सरदार जकाँ ओकरा शरण देलक। एतबे नै समय अएला पर रावण ओकर उपयोग सेहो केलक।

एहि वेबसाइटक विषयसूची

खर आ दूषण- ई दूनू रावणक वैमात्रेय भाइ छल। ऋषि विश्रवाक कमसँ कम पत्नीक नाम भेटैत अछि1. पुष्पोत्कटा 2. वाका 3. कैकसी। खर पुष्पोत्कटा सँ आ दूषण वाका सँ उत्पन्न भेल छल, जखनि कि कैकसी सँ रावणक जन्म भेल रहए। शूर्पणखा रावणक बहिन छल से तँ सभ केओ जनिते छी।

एतबे नहिं, सुबाहु, कबन्ध आदि राक्षस जकर वधक कथा वाल्मीकीय रामयणक अरण्यकाण्डमे आएल अछि ओ सब प्रत्य रूपसँ अथवा पोरक्ष रूपसँ रावणसँ जुडल छल। एहिमे सँ अनेक एहन राक्षसक उल्लेख भेल अछि जे मूल रूपसँ यक्ष गंधर्व आदि देव-योनिक व्यक्ति रहए मुदा राक्षस अपहरण कए ओकर अपन दल मे मिलाए नेने छल। आइयो अनेक नीक घरक बच्चा आतंकवादीक हाथमे पडि पथभ्रष्ट भए आतंकक पर्याय बनि जाइत अछि। रामक हाथें जखनि एहन राक्षसक मृत्यु भेल अछि तखनि ओ कहैत अछि जे अहाँक हाथें मृत्यु पाबि आइ हम धन्य भेलहुँ, हमर एहि बनौआ रूपसँ मुक्ति भेटल। ई सभटा आतंकवादकें परिभाषित करैत अछि।

वाल्मीकीय रामायणक अरण्यकाण्डमे सभसँ पहिने सीताक अपहरण विराध नामक राक्षस करैत अछि। ओ अपन परिचय दैत अछि जे हम जवक पुत्र छी आ हमर माताक नाम थीक- शतह्रदा। (वा.रा.- 3.3.5) ब्रह्माक तपस्यासँ प्राप्त वरदानक कारणें ओ एतेक शक्तिशाली अछि जे ओकरा केओ मारि सकैत छैक। ओ वस्तुतः तुम्बरु नामक गन्धर्व छल जे कुबेरक शापसँ राक्षस बनि गेल। कुबेरक संग रहैत ओ कोनो बदमाशी केने होएत आ ओकरा राक्षस कहि भगा देल गेल होएत। एहि विराधक वध राम आ लक्ष्मण कएलनि तखनि सीता मुक्त भेलीह।

अरण्यकाण्डमे वर्णन आएल अछि जतए जतए राम वनमे रहनिहार शान्तिप्रिय आश्रममे गेलाह ओतए राक्षसक उपद्रवक चर्चा सुनलनि। एकठाम तँ एहने शान्तिप्रिय वनवासीक अस्थिसभक समूह हुनका देखाओल गेल जे राक्षसक द्वारा मारल गेल छल। राम एहने आतंकवादी राक्षस सभक वध कए वनकें आतंकक साम्राज्यसँ मुक्त करए चाहैत रहथि जे रावण-वधक बाद पूर्ण भेल।

एहि प्रकारें ई बुझबाक चाही जे रामकथामे राक्षस शब्द कोनो विशेष वर्ग, समुदाय अथवा जातिक बोध नै करबैत अछि। ओतए दू सोदर भाइमेसँ एक कें राक्षस कहल गेल अछि आ दोसरकें नहिं।

रामक सम्पूर्ण वनवासकाल आतंकवादक विरुद्ध लड़ैत बीतल। ओहने आतंकवादीक सरदार रावणकें मारि ओ सम्पूर्ण प्रदेशमे शान्ति स्थापित कएलनि।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *