JIvan Ek Prayogashala

अशोक पेपर मिलक अन्तिम साँस

लेखक स्व. डा. बिनोदानन्द झा “विश्वबन्धु”

राज दरभंगा द्वारा स्थापित चीनी मिल, जूट मिल, पेपर मिल सभ केना बंद भेलैक तकर प्रत्यक्षदर्शी छलाह एहि सभ मिलक उच्च पद पर काज केनिहार डा. बिनोदानन्द झा “विश्वबन्धु”। सकरी चीनी मिल मे लेबर आफिसरक रूप मे काज आरम्भ केनिहार स्व. डा. झा मिथिलाक नष्ट होइत उद्योग धंधा कें अपना आँखिएँ देखने छलाह। हुनक आत्मकथा जीवन एक प्रयोगशाला एहि घटना सभसँ भरल-पूरल अछि।

अशोक पेपर मिलक सम्बन्ध मे आरो कतेक रास हुनक आत्मकथा अछि। आइ जखनि प्रसंग आएल अछि तँ अशोक पेपर मिल बंद होएबाक घटना पर हुनक भोगल यथार्थ एतए उद्धृत अछि-

(पृष्ठ संख्या 92-94)

“भ्रष्ट राजनीतिज्ञ लोकनिक शिकार अशोक पेपर मिल भ’ गेल।

अशोक पेपर मिल आसाम आर बिहार दुनू सरकारक संयुक्त साझीदारीमे छलैक। किन्तु एकरा पर प्रत्यक्ष रुपें कोनो सरकारक हस्तक्षेप नै चलैत छलैक। ओना एकरा बोर्ड ऑफ़ डाइरेक्टर्स द्वारा चलौल जाइत छलैक, जे राजनीतिज्ञ लोकनि सँ दूर प्राफ़ेशनल मैनेजमेटक रूपमे चलैत छलैक। दरभंगा महाराजा द्वारा स्थापित ई मिलके महाराजाक अचानक देहावसानक समय जखनि बन्द भ’ गेलैक आर दरभंगा राज्यक एक्सक्यूटर पं. लक्ष्मीकान्त झा जखनि एकरा आसाम सरकारक हाथे बेचबा ले तैयार भेलाह त’ तत्कालीन मुख्यमंत्री एवं कर्पूरी ठाकुरक अथक प्रयत्न सँ ई मिल के आसाम आर बिहार सरकारक ज्वाइन्ट वेन्चरक रुपमे पुर्नजीवित कैल गेल। आर श्री ए. डी. अधिकारी आई. ए. एस. क’ निर्देशनमे आसाम आर बिहार दुनू जगह मे मिल सुचारु रुपसँ चलिक’ बहुत जल्दी देशक कागज उद्योगमे अपन छवि नीक बना लेलक।  

किन्तु डा. जगन्नाथ मिश्रक कार्यकालमे एकरहु पर ग्रहण लागि गेलै, सब किछु नष्ट भ’ गेलैं। बिना कारण के हिनका लोकनिक व्यक्तिगत स्वार्थ अशोक पेपर मिल के बन्द करा देलक। हिनके लोकनिक व्यक्तिगत स्वार्थक कारणे आपसी बंटवारा वाली बात उठलै आर कम्पनी बन्द भ’ गेलै।

एक घटनाक हम प्रत्यक्षदर्शी छी। दुर्भाग्यवश एहि कम्पनी के ने त’ पैसाक कमी भेलै, ने मार्केंटिंगक समस्या, ने कच्चे मालक कमी, ने मजदूरे ल’ के परेशानी भेलै, सब चीज अछैत, बन्द भ’ गेलै। किछु राजनीतिज्ञ मंत्री एवं बिहार सरकारके तत्कालिन अधिकारी लोकनि एहि कम्पनी के अपन चारागाह बनबए चाहैत छलाह, जे नै भ’ रहल छलनि। ओ चाहैत छलाह जे यदि आपसी बटवारा भ’ के बिहार सरकारक हाथमें आवि जाए, त’ बिहारक मंत्रिलोकनि एवं ऑफि़सरोक व्यक्तिगत रुपसँ लाभ होइतनि।

एहेन लोक मे डा. जगन्नाथ मिश्र, श्री रामाश्रय प्रसाद सिंह उद्योग मंत्री एवं श्री भैरव मिश्र (उद्योग विभागक मुख्य अधिकारी छलाह जे अशोक पेपर मिलक फ़ाइल के मुख्यतया निवारण करैत छलाह जिनकर नाम लेल जा सकैत अछि। आसाम से श्री ए. डी. अधिकारी प्रबन्ध निदेशक छलाह। हुनकर चयन यू. एन. ओ. विदेशमे भ’ जेबाक कारणे, जखनि ओ जाए लगलाह, त’ बिहार सरकारमे एक दक्षिण भारतीय मि. नाथन आइ. ए. एस. उद्योग विभागक सचिव हेबाक कारणे पूर्वमे सेहो डाइरेक्टर रहि चुकल छलाह, आर हुनका पेपर मिलमे अधिक रुचियो छलनि, तें हुनकर नाम प्रबन्ध निर्देशक बनेबा ले शिफ़ारिश केलथिन।

बहुत कठिनतासँ मुख्यमंत्री हुनका रिलीजो क’ देलखिन। किन्तु जखनि ओ गौहाटीमे ज्वाइन करबाले गेलाह, त’ ओइ समय आसाम आन्दोलन चरम सीमा पर रहबाक कारणे असामी लोकनि हिनकर विरोध क’ ज्वाइन करए नै देलकनि जे प्रबन्ध निर्देशक आसाम कैडरे सँ होएबाक विधान छैक। ओ वापस भ’ के पटना चलि एलाह।

आसाम-बिहार सरकारमे पेपर मिलक राजनीति अही घटनासँ गरमाब” लागल। किछु स्वार्थी अधिकारी वर्ग जे पेपर मिल के अपन चारागाह बनब” चाहैत छलाह, हुनका लोकनि के अपन-अपन रोटी सेकवाक मौका भेटि गेलनि। डॉ डी. के. बोरा कार्यकारी प्रबन्ध निर्देशक बनौल गेलाह। ओना त’ ओतय हम वरीय कार्मिक पदाधिकारीक पद पर छलहुँ, किन्तु पूर्व प्रबन्ध निर्देशक प्रायः हमर कार्य क्षमताक तारीफ़ बोरा साहेब के कहि गेल रहथिन, जाहि सँ ओ हमरा अपन अप्रत्यक्ष रूपें सलाहकार बना लेलनि। बिहार सरकार से 40 लाख रूपया लेबाक छले, तें हम बिहारक मुख्य मंत्री डा. जगन्नाथ मिश्रसँ श्री बोरा साहेब के भेंट करबाक तिथि-समय निर्धारित करबौल।

श्री अरुण पाठक उद्योग विभागक सचिव छलाह। हम आर बोरा साहेब पटना गेलौ, पाटलीपुत्र होटेल मे ठहरलौं आर ओत’ सं तैयार भ’ के सचिवालय गेलौ। ओत’ पहिने उद्योग सचिव श्री अरुण पाठकजी सँ भेट केलियनि। ओ सलाह देलनि जे मुख्यमंत्री जी दरभंगा गेल छथि, अएबा मे समय लगतनि, अहॅा लोकनि ताबत उद्योगमंत्री सँ भेंट क’ लिय’। हम दुनू गोटे मंत्री महोदय सँ भेंट करबा ले हुनके चेम्बरमे प्रवेश कएनहि रही, कि मंत्री महोदय कोनो औपचारिकताओ नै निभौलनि। हमरा लोकनिके बैसबो तक ले नै कहलनि जेना कि पहिनहि सँ तैयार होथि, एकतरफ़ा बहुत खराब तरहें बोरा साहेब के गारि फ़ज्जति करैत रहलाह। संयोगवश ओ हिन्दी नै बुझैत छलथिन, तथापि फ़ेर एतबा त बुझिये गेलथिन जे ई हमरा गारि द’ रहल छथि। ओ कहलनि- Let us go back. These Bihari politician will not allow to run the Mill. Now we will not see your CM. अर्थात् हम सब वापस चली ई बिहारी राजनीतिज्ञ मिलके नंइ चलबए देताह आब हम अहाँक मुख्यमंत्री सँ सेहो भेंट नै करब। हम दुनूगोटे ओत’ सँ वापस भ’ के गौहाटी आवि गेलहुँ।

बोरा साहेब बहुत ईमानदार ईज्जतदार आसाम मे मानल जाइत छलाह, हिनकर पिता सेहो आसामक जानल-मानल ईज्जतदार काग्रेसी नेता रहि चुकल छलाह। ई बेइज्जतीक सूचना सुनिते आसामी लोकनिक शरीरमे आगि लागि गेलै। ओ सब ओतुका बिहारी लोकनिंक शत्रु भ’ गेल। आर ई घटना सँ पेपर मिलमे आसाम-बिहार सरकारक बीच फ़ूटक नींव पड़ि गेलै। धीरे-धीरे दुनूक क्रिया कलापोमे आगिमे धीक आहूति देबाक काज करैत रहलै। मंत्रीगण, किछु अधिकारी वर्ग फ़ूटक पूरा लाभो उठौलनि। मुर्दाक शरीर सँ गिद्ध जेकां नोचि नोचि अपन पेट भरय लगलाह, आर हजारो श्रमिक लोकनिक पेट पर लात मारिक’ बिहारक एक नीक उद्योग के जकरा हम किछु गोटे जी जान लगाक’ ठाढ करबाक गौरव प्राप्त केने रही क्षणिक लोभक कारणे बन्द करबाक श्रेय प्राप्त क’ लेलनि।

मंत्रीजीक पाप गुप्ते रहलनि कारण ओत’ प्रत्यक्षदर्शी मात्र हम चुप्पे रहलहुँ। तकर कारण बिहारी होएब छल आर पछिला स्व. हरिनाथ मिश्रजी के कहबाक भोग भोगि चुकल छलहुँ। आर अपने स्वार्थमे आन्हर पुनः बिहार आबए चाहैत छलहुँ।”