अयोध्या राम जन्मभूमिक संक्षिप्त इतिहास

विक्रमादित्यक बनाओल मन्दिर जखनि ध्वस्त भए गेल तखनि 12म शतीमे गहड़वालक राजा गोविन्दचन्द्रक सामन्त अनयचन्द्र जन्मस्थान पर विशाल मन्दिर बनओलनि जेकर शिलालेख विवादित ढाँचा खसएबाक क्रम मे 6 दिसम्बर, 1992 कें भेटल छल।

राँचीसँ प्राप्त मैथिलीक शिलालेख

जॉर्नल ऑफ एसियाटिक सोसायटी ऑफ बंगालक अंक संख्या 40, वर्ष 1871 ई. मे पृष्ठ संख्या 102 पर छोटानागपुरसँ प्राप्त तीन टा शिलालेखक सूचना देल गेल अछि। एकर लेखक रखालदास हालदार सैचित करैत छथि जे तत्कालीन छोटा नागपुर जिलासँ बहुत कम संख्यामे शिलालेख भेटबाक कारणें ई जे तीन टा लेख भेटल अछि से महत्त्वपूर्ण अछि।

A Missing Brahmanical Inscription on Dashavatar panel from Kesaria Stupa

पछवारि मिथिलामे अवस्थित केसरिया स्तूप एखनि बौद्ध पुरातात्त्विक केन्द्र मानल जाइत अछि, मुदा ओहिठाम सँ अतीतमे जे एकटा दशावतारक मूर्ति भेटल छल, ओहि पर शिलालेख सेहो छल, ताहि मूर्तिक कोनो उल्लेख बादमे नहिं भेटि रहल अछि।

Pandita Madhusudan Ojha and his work Purana-nirmana-adhikarana

पं. मधुसूदन शर्मा मैथिल आधुनिक भारतीय विद्वानों में अग्रगण्य माने जाते हैं। उन्होंने हमेशा भारतीय परम्परा की रक्षा के लिए अनेक ग्रन्थों की रचना की, जिनमें से कई आजतक अप्रकाशित हैं। 19वीं शती के अन्तिम समय से 20वीं शती के आरम्भ में उन्होंने इन ग्रन्थों की रचना की।

Gauri-shankar Shiva at Hajipur

हाजीपुरमे मस्जिद चौक लग लालकोठीक कातमे एकटा गौरीमुख शिवलिंग स्थापित छथि जतए किछु दशक पूर्व एकटा नव मन्दिर बनाओल गेल अछि। ई शिवलिंग अपन अनेक विशेषताक कारणें आध्यात्मिक आ ऐतिहासिक दृष्टिसँ महत्त्वपूर्ण अछि।

महाराज रुद्रसिंह आ हुनक सम्पत्ति

महाराज रुद्र सिंहक शासनकालमे कतेक सम्पत्ति छल आ राज दरभंगाक वार्षिक आमद कतेक छल तकर विवरण एतए भेटत। सूनिके आश्चर्य लागत जे अंगरेज सेहो ई मानैत छल जे राज दरभंगा प्रायः भारतक सभसँ धनिक राजा छथि।

अफीम कमीशनमे महाराज लक्ष्मीश्वर सिंह

नशाक रूपमे अफीमक प्रयोग रोकबाक लेल 1893 मे एक समितिक गठन भेल छल, जाहिमे राज दरभंगाक महाराज लक्ष्मीश्वर सिंह सेहो रहथि।

शिक्षाक क्षेत्रमे दरभंगा महाराज रुद्रसिंहक द्वारा कएल गेल काज

भागलपुरमे ई विद्यालय खोलबाक लेल कुल व्यय 1,370 रुपया आँकल गेल जाहिमे 600 रुपयाक व्यवस्था महाराज रुद्रसिंहक द्वारा देल गेल।

मिथिलामे नोनीक विनाशलीला आ ओकर व्यापार

मिथिलाक प्राचीन संस्कृति, परम्परा आ इतिहास पर विचार करबाक कालमे हमरालोकनिकें एकर पुरान प्राकृतिक स्वरूप कें ध्यान राखए पड़त। आ एही क्रममे हमरालोकनि एकटा प्रमुख घटकक रूपमे नोनी कें पबैत छी।