अयोध्या राम जन्मभूमिक संक्षिप्त इतिहास

विक्रमादित्यक बनाओल मन्दिर जखनि ध्वस्त भए गेल तखनि 12म शतीमे गहड़वालक राजा गोविन्दचन्द्रक सामन्त अनयचन्द्र जन्मस्थान पर विशाल मन्दिर बनओलनि जेकर शिलालेख विवादित ढाँचा खसएबाक क्रम मे 6 दिसम्बर, 1992 कें भेटल छल।

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A Missing Brahmanical Inscription on Dashavatar panel from Kesaria Stupa

पछवारि मिथिलामे अवस्थित केसरिया स्तूप एखनि बौद्ध पुरातात्त्विक केन्द्र मानल जाइत अछि, मुदा ओहिठाम सँ अतीतमे जे एकटा दशावतारक मूर्ति भेटल छल, ओहि पर शिलालेख सेहो छल, ताहि मूर्तिक कोनो उल्लेख बादमे नहिं भेटि रहल अछि।

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Pandita Madhusudan Ojha and his work Purana-nirmana-adhikarana

पं. मधुसूदन शर्मा मैथिल आधुनिक भारतीय विद्वानों में अग्रगण्य माने जाते हैं। उन्होंने हमेशा भारतीय परम्परा की रक्षा के लिए अनेक ग्रन्थों की रचना की, जिनमें से कई आजतक अप्रकाशित हैं। 19वीं शती के अन्तिम समय से 20वीं शती के आरम्भ में उन्होंने इन ग्रन्थों की रचना की।

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गावो मे मातर: सन्तु

जहाँ एक गाय को बचाने के लिए दिलीप-जैसे प्रतापी राजा अपना शरीर तक त्याग कर देने की बात करें, वहाँ गाय को मारकर खाने की बात करना बकबास है।

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प्राचीन काल में शूद्रों को निःशुल्क शिक्षा

शूद्र और उग्र से भी शुल्क लेना धर्म-सम्मत है।’ सर्वदा शूद्रत उग्रतो वाचार्यार्थस्याहरणं धार्म्यमित्येके। (1 । 2 । 19) यानी हमेशा शूद्रों अथवा उग्रों से आचार्य के हिस्से का धन वसूलना चाहिए ऐसा कुछ आचार्य कहते हैं।

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ऋग्वेदमे श्राद्धकर्मक मूल भावना

सनातन धर्ममे मरणोपरान्त दाह-संस्कार कएल जाइत अछि। एहि संस्कारक संकेत हमरालोकनिकें ऋग्वेदमे सेहो भेटैत अछि।

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सांस्कृतिक ह्रासक एक विषय- श्राद्धकर्मक प्रति उदासीनताक भाव

माता-पिताक मृत्युक उपरान्त सभ दिन एतेक कर्म हमरालोकनिक संस्कृतिमे अछि। श्राद्ध, प्रतिवर्ष एकोद्दिष्टश्राद्ध, पार्वण, प्रतिदिन तर्पण आ विशेष रूपसँ पितृपक्षमे तर्पण, दीपावलीक दिन उल्काभ्रमण आ ब्राह्मणभोजन, गया-श्राद्ध आ अन्य पवित्र तीर्थमे श्राद्ध।

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बाँधे मूँज जनेऊ साजे अथवा कांधे माँझ जनेऊ छाजै

हनुमानजी की स्तुतिमे हनुमानचालीसा आज सबसे प्रसिद्ध स्तोत्र है। गीताप्रेस से प्रकाशित तथा सर्वत्र प्रचलित पाठ में एक स्थान पर काँधे मूँज जनेउ छाजै पाठ है।

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Bhuta and Preta

भूत आ प्रेत ई दूनू शब्द अंधविश्वास आ डरक पर्याय बनि गेल अछि। भारते नहिं, सम्पूर्ण विश्वमे अनेक खिस्सा-पिहानी गढि कए, “हॉरर” सिनेमा बनाकए खूब व्यापार कएल गेल अछि।

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Site of Ancient Mithila 02

6 आंगुर पलभा गणनाक आधार पर 26.56505°N अक्षांशक थीक। 26.5952° N अक्षांश पर सीतामढीक जानकी मन्दिर अवस्थित अछि।

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