Buddhacharita reviews

एतस्य बुद्धचरितस्याश्वघोषस्यैव शैल्यां समुद्धारव्रती भवनाथझाः तदानीन्तनेन कामेश्वरसिंहदरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालयस्य कुलपतिनाऽऽचार्य किशोरकुणालेन भृशमुत्साहितः सम्पूर्णं तन्महाकाव्यस्य लुप्तं संस्कृतभागं स्वकाव्यप्रतिभया मूलप्रायेण रूपेणानीतवान्। प्रो. उमाशङ्कर शर्मा “ऋषिः” अत्रापि कथयितुं शक्येत यदश्वघोषकृतं बुद्धचरितं यदि साकल्येन … Read More

Pandita Madhusudan Ojha and his work Purana-nirmana-adhikarana

पं. मधुसूदन शर्मा मैथिल आधुनिक भारतीय विद्वानों में अग्रगण्य माने जाते हैं। उन्होंने हमेशा भारतीय परम्परा की रक्षा के लिए अनेक ग्रन्थों की रचना की, जिनमें से कई आजतक अप्रकाशित हैं। 19वीं शती के अन्तिम समय से 20वीं शती के आरम्भ में उन्होंने इन ग्रन्थों की रचना की।

कोइलख

विवेच्य पुस्तक कोइलख गामक सारस्वत परम्पराक इतिहास थीक। एहिमे 39 दिवंगत एवं 6 जीवित व्यक्तिक परिचयक संग हुनक कृतिक सूचना संक्षेपमे देल गेल अछि।

पण्डित गणनाथ झा रचनावली

विवेच्य ग्रन्थमे म.म. डा. सर गंगानाथ झा द्वारा संकलित आ प्रकाशित गणनाथ-पदावली तथा विन्ध्यनाथ पदावली कें हुनक भूमिकाक संग अविकल रूपसँ संकलित कएल गेल अछि।

चिकना गामक इतिहास-लेखन

आलोच्य पुस्तक दू भागमे अछि। पहिल भागमे लेखक अपन वंशावली, पारिवारिक सम्बन्ध लिखलाक उपरान्त चिकना गामक इतिहास आ वर्तमान स्थितिक विवरण देने छथि।

रामचरितमानस के प्रथम संस्करण की विशेषता

बहुत कम पाठकों को यह विदित है कि गोस्वामी तुलसीदास रचित रामचरितमानस के प्रथम सम्पादक, हिन्दी के आदि गद्यकार, पं. सदल मिश्र थे। उनके द्वारा सम्पादित यह ग्रन्थ कलकत्ता से 1810 ई. में प्रकाशित हुआ था।

Asato ma sadgamaya

प्रस्तुत संकलन डा. एस. एन. पी. सिन्हा द्वारा लिखित एवं विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में पूर्व प्रकाशित आलेखों, संस्मरणों, भेंटवार्ताओं एवं विभिन्न अवसरों पर दिये गये व्याख्यानों का दूसरा संकलन है।