Dr. Amoda Jha

स्व. डा. आमोद झा मिथिलाक कुशल पाण्डुलिपि-विज्ञानी रहथि। ई अनेक संस्कृत ग्रन्थ कें मिथिलाक्षरक पाण्डुलिपिसँ लिप्यन्तरण कए ओकर सम्पादन कएने रहथि। कमे समयमे हिनक कएल काज सभ दिन महत्त्वपूर्ण रहल। दुर्भाग्य जे अल्प अवस्थामे 1993 ई. मे हिनक देहान्त भेल आ मिथिलाक्षरक एकटा पाण्डुलिपि-शास्त्री सँ हमरालोकनि वंचित भए गेलहुँ। हिनक असमय देहान्त सँ एकटा अपूरणीय क्षति भेल छैक।

Dr. Shashinath Jha

मिथिला के आधुनिक विद्वानों में अन्यतम डा. शशिनाथ झा, एक साथ मिथिला के इतिहास, पाण्डुलिपिशास्त्र, संस्कृत व्याकरण, साहित्य, धर्मशास्त्र आदि के विद्वान् हैं। इन्होंने सौ से अधिक ग्रन्थों का सम्पादन तथा लेखन किया है।

Ram Bharos Kapari Bhramar

मैथिली आ मिथिलाक लेल समर्पित लेखक, सम्पादक, पत्रकार श्री राम भरोस कापरि भ्रमर वर्तमानमे नेपालीय मैथिली साहित्यक सशक्त हस्ताक्षर छथि।

Dr. Sushant Kumar

मिथिला के इतिहास एवं पुरातत्त्व, विशेष रूप से मूर्ति-विज्ञान एवं वास्तु कला पर कार्य करनेवाले आधुनिक विद्वानों में डा. सुशान्त कुमार का नाम लिया जा सकता है। इनका यह कार्य निर्बाध गति से चलता रहे इसी शुभकामना के साथ….