Procedure of funeral in Mithila

जनिक मृत्यु शहरमे होइत छनि आ कोनो नदीक कातमे अंतिम-संस्कार होइत अछि, हुनकामेसँ अधिकांश लोकक लेल अपन परम्पराक पालन चाहिओ कए कठिन भए जाइत छनि।

Ghanta-karna worship in Mithila

लगभग 2010 ई. धरि ई पूजा होइत हम देखने छी। एहिमे डमरूक आकारक माँटिक पाँच आकृति, माँटिक दिबारी जकाँ एक आकृति तथा ओकर ढक्कन जकाँ दोसर आकृति एहि प्रकारें कुल सात आकृति बनाए तीन दिन पूजा कएल जाइत छल।

Kutupa and Rohina

श्राद्ध आ एकोद्दिष्टक विषयमे कुतुप कालक विचार होइत अछि। एकोद्दिष्ट आदि पितृकर्म कोन तिथिक कोन दिन होएत आ कखनि आरम्भ करबाक चाही तकर विचार करबामे कुतुप आ रोहिण नामक दू मुहूर्तक विचार कएल जाइत अछि

dikshula and digbala

एहिसभ विषयकें आधुनिक लोक दकियानूसी बुझैत छथि। मुदा हमरालोकनिकें बुझबाक चाही जे हमर पूर्वज एकर निर्वाह कए गेल छथि। ई हमरासभक परम्परा थीक।

Dhanvantari Jayanti

पुराणों के अनुसार धनतेरस अमृत कलश के साथ भगवान् धन्वन्तरि की उत्पत्ति का दिन है। इस दिन लोग, विशेष रूप से वैद्य, भगवान् धन्वन्तरि की उपासना करते हैं और उनकी कृपा से सभी लोगों के स्वस्थ रहने की प्रार्थना करते हैं।

छठि पूजा विधि एवं व्रतकथा

सन्ध्याकाल नदी अथवा पोखरिक कछेर पर जाए अपन नित्यकर्म कए अर्थात् सधवा महिला गौरीक पूजा कए आ विधवा विष्णुक पूजा कए पश्चिम मुँहें सूर्यक दिस देखैत कुश, तिल आ जल लए संकल्प करी-

मैथिलीमे छठि व्रतक मैथिल साम्प्रदायिक कथा

परम्परासँ व्रतकथा संस्कृतमे होइत अछि। एखनहु अनेक ठाम पुरोहित रहैत छथि आ ओ विधानपूर्वक पूजा कराए कथा कहैत छथिन्ह। जँ सम्भव हो तँ ओकरे उपयोग करी।