Gauri-shankar Shiva at Hajipur

हाजीपुरमे मस्जिद चौक लग लालकोठीक कातमे एकटा गौरीमुख शिवलिंग स्थापित छथि जतए किछु दशक पूर्व एकटा नव मन्दिर बनाओल गेल अछि। ई शिवलिंग अपन अनेक विशेषताक कारणें आध्यात्मिक आ ऐतिहासिक दृष्टिसँ महत्त्वपूर्ण अछि।

एहि शिवलिंग पर एक कात गौरीक मुख सेहो बनाओल अछि। एहि मुखक कानक गहना कर्णफूल अछि जकर एक कात “रा” आ दोसर कात “म” मिथिलाक्षरमे लिखल अछि।

जलधरीक नीचाँ अरघा पर अष्टदल कमल भूपुरक संग अंकित अछि। शिवलिंगक पर गायत्रीमन्त्र मिथिलाक्षर/तिरहुतामे अंकित अछि।

शिवलिंग पर नीचाँमे अन्नपूर्णाक मन्त्र परवर्तीकालमे देवनागरीमे खोधल गेल अछि।

एकर स्थापनाक सम्बन्धमे हाजीपुर महाविद्यालयक पूर्व दर्शन विभागाध्यक्ष डा. श्यामानन्द चौधरीक (दिवंगत) कथन छनि जे ई शिवलिंग मिथिलाक प्रसिद्ध तान्त्रिक महामहोपाध्याय मदन उपाध्यायक द्वारा स्थापित कएल गेल छल।

फेसबुक पर 2016 ई.मे एहि शिवलिंग पर चर्चा करैत डा. चौधरी लिखने रहथि जे

Snchaudhary Hajipur प्रायः आहाँ हाजीपुर के हेलाबाजार स्थित गौरीशंकर महादेव के विषय में चर्चा कएल अछि।हिनकर स्थापना मिथिला के महान पंडित एवं तांत्रिक मदन उपाध्याय कएने छथि। ध्यान सं देखला सँ अष्ट कमल दल पर स्थापित शिवलिंग पर श्रीयंत्र एवं प्रत्येक कमल दल पर बीज मन्त्र अंकित अछि। लगभग 40 वर्ष पूर्व दिल्ली सं आयल शोध दल हमारा ओ मिथिलाक्षर में लीखल मंत्र आदि पढबा लए ओतए ल गेल छलाह आ हम हुनका सभ के पढ़ि क ई सभ कहलियन्हि।हाजीपुर में शिवइ सिंह पोखरि सेहो छैक। आदि आदि।

डा. श्यामानन्द चौधरीक टिप्पणी

मुदा डा. शंकरदेव झाक कथन छनि जे

Shankerdeo Jha प्रायः ई शिवलिंग अठारहम शताब्दीमे उमानाथझा बख्शीक स्थापित कराओल छनि।

डा. शंकरदेव झाक टिप्पणी

म.म. मदन उपाध्याय पर काज केनिहार आ हुनक ग्रामीण विद्वान् शोधकर्ता श्री विनयानन्द झा सूचित करैत छथि जे

Binayanand Jha Snchaudhary Hajipur मदन उपाध्याय द्वारा हाजीपुर मे भगवती स्थापनाक प्रसंग मे सेहो बात परंपरा सँ कहल जाइत आछि। किंतु निश्चित स्थान अज्ञात अछि। अपने एहि पर प्रकाश द’ सकैत छी वा आगू अन्वेषण क’ सकैत छी।
मदन उपाध्याय के नाम जबलपुर के निकट भेड़ाघाट मे नर्मदा किनार योगिनी मंदिर सँ सेहो जोड़ल जाइत अछि।

डा. श्यामानन्द चौधरीक टिप्पणीक उत्तरमे श्रीविनयानन्द झाक टिप्पणी

एहि शिवलिंगक विशेषता अछि जे एकर अरघाक वलय पर देवनागरीमे सेहो “रामपद” लिखल अछि आ ओकरे कातमे “विश्वनाथ सहाय” सेहो अंकित अछि। रामपद शब्द लग एकटा चरणचिह्न सेहो अछि।

एकर सभ अभिलेखक अक्षर पाथर पर उभाडि कए लिखल गेल अछि, आन अभिलेख जकाँ खोधल नै अछि। एहि शिवलिंग निर्माणक ई सभसँ पैघ विशेषता थीक। एहि पर अग्रतर शोध आवश्यक अछि।

एहि गौरीशंकर शिवलिंगक सम्बन्धमे K.P. Jayaswal Research Institute, Patnaसँ प्रकाशित गजेटियरमे कहल गेल अछि जे-

Gauri-Sankara Temple: An inscribed black stone image of Ekamukhi sivalinga is placed in a modern temple. This temple is situated on a mound. The structural ruins of dwellings built in Lakhauri bricks (16×11×0.4cms.) were noticed on the mound, and this is locally called as Ballabhåcårya Ji Kå Baithaka.

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